>Kuch Kariye

>चार कदम का सफर, उसके दो-चार हमसफर, थोड़ी आंधियां, थोड़ी खुशबू, थोड़ी खुशियां, थोड़े गम इसी से तो बंधी होती है जिंदगी। और कुछ करें न करें, वक्त तो कट ही जाता है। ढलता सूरज, धीरे-धीरे ढलता है, ढल जाएगा। आप कुछ करें या न करें वक्त तो बीत ही जाएगा। इसलिए इस बीतते वक्त की नब्ज पकड़ें और कुछ करें। कुछ भी करें पर करें। आपके हर दिन का कुछ न कुछ आउटपुट होना चाहिए। यह आउटपुट ही आपको समग्रता में चमकीला भविष्य देगा। गारंटी है।

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